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सोमवार, 9 नवंबर 2015

आठ नवंबर की सुबह से सोशल मिडिया, ट्विटर इत्यादि पर मौन छाया हुआ है।

आठ नवंबर की सुबह से सोशल मिडिया, ट्विटर इत्यादि पर मौन छाया हुआ है। इसका कारण है कि बिहार विधानसभा के चुनाव में भाजपा हार गयी और नितीश कुमार, लालू यादव का गठबंधन जीत गया। यह एक राजनैतिक घटना है और ज़ाहिर है इसके निहितार्थ भी होंगे। भिन्न-भिन्न लोग अपने-अपने हिसाब से इसका राजनैतिक विश्लेषण भी करेंगे ? यह न हुआ होता और यह हो गया होता जैसी ढेर सारी बातें निकली जायेंगी मगर इस हार के कारण मित्रो आपमें ग्लानि का भाव कैसे दिख रहा है ?
आक्षेप के स्वर में पूछ रहा हूँ क्या आप यहाँ बिहार में सुशील मोदी या भाजपा के किसी अन्य नेता की सरकार बनवाने के लिये प्राणप्रण से सक्रिय थे ? क्या आपका लक्ष्य भारत माता को जगज्जननी के सिंहासन पर बैठे देखने की जगह बिहार में भाजपा की सरकार बनवाना था ? क्या आपका लक्ष्य राष्ट्र की सर्वांगीण उन्नति नहीं है ? क्या आप राष्ट्र को परम वैभव के शिखर पर विराजमान देखने के अतिरिक्त भी कुछ चाहते हैं ? मैं जानता हूँ कि आप सब अपनी आजीविका, विकास के लिये किसी पर निर्भर नहीं हैं ? कोई संगठन आपको सोशल मिडिया पर नहीं लाया है। राष्ट्र की चिंता, उसके प्रति जागरूकता, उस के प्रति पीड़ा आपको बाध्य करती है कि आप अपना समय केवल स्वयं को देने के स्थान पर समाज के हित में लगाते हैं।
ज़ाहिर है आप जिस लक्ष्य के प्रति समर्पित हैं उसके लिये बिहार में नितीश कुमार, लालू यादव, इटैलियन देवी के गठबंधन के स्थान पर भाजपा का होना सहयोगी होता मगर निश्चित ही आपका कार्य केंद्र और प्रदेशों में भाजपा की सरकारें बनवाना नहीं है। आपका लक्ष्य उससे बहुत बड़ा है। आपकी लड़ाई तो बहुत लंबी है। सदियों से आहत, क्लांत, खिन्न राष्ट्र को उबारना, उभारना आपका कार्य है। तो एक छोटी पराजय से सम्पूर्ण सेना हत-बल, हत-तेज कैसे दिखाई दे रही है ? राष्ट्र के शरीर पर लगे 1200 वर्ष के घाव एक प्रान्त की हारजीत से भरने से रहे। भारत माता के कटे हुए दोनों हाथ बिहार की जीत से वापस तो हो नहीं सकते थे।
आप का मनोबल टूटना पदातिकों का मनोबल टूटना नहीं है बल्कि सेनापतियों का मनोबल टूटना है ? हुंकार भरिये । बहुत से लोग रोकेंगे मगर जीतना तो है। कई बाधायें आएँगी, कई हार होंगी मगर अंतिम विजय राष्ट्रवादियों की यानी आपकी ही होगी। ये महाभारत आपको जीतना ही है। संभव है ये कार्य 10-15 की जगह 20-30 वर्ष ले ले मगर कटिबद्ध तो होना ही है।
विश्व इस दानव से जूझने के लिये तैयार होता दिख रहा है। रूस ने इस्लामी ख़िलाफ़त के दावेदार और वर्तमान स्वरूप आई.एस.आई.एस. की लगातार ठुकाई के बाद डेढ़ लाख सैनिक सीरिया में उतार दिए हैं। सीरिया पर होने वाले किसी भी हमले को रूस स्वयं पर हमले की तरह लेगा। अमरीका के नेतृत्व में सीरिया पर होने वाले आक्रमण के जवाब में रूस तुरंत सऊदी अरब पर प्रहार करेगा। तृतीय विश्व युद्ध के बादल विश्व-क्षितिज पर घिरते दिख रहे हैं। हम भारत-वासी भरतवंशी, हमारा सैन्य विश्व-शांति के इस महायज्ञ में पूर्णाहुति डालने के लिये बाध्य हैं। प्रथम विश्वयुद्ध, द्वितीय विश्वयुद्ध हम भरतवंशियों ने ही लड़ा था और तीसरा और अंतिम विश्वयुद्ध भी हम ही लड़ेंगे। किसी राष्ट्र के पास इतना सैन्य नहीं है। फिर यह तो 1200 वर्षों से रिसते आ रहे घावों को सिलने का समय है। राष्ट्र को तैयार कीजिये। पौरुष का उसी तरह आह्वान कीजिये जैसा कल तक आप करते आ रहे थे। महाकाल हमें यशस्वी करेंगे और हमारा भारत पुनः अखंड होगा।
तुफ़ैल चतुर्वेदी

13 टिप्‍पणियां:

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  2. शुम्भ निशुम्भ का उदय हुआ है तो उनके विनाश के लिए देवी माँ भी जरुर प्रकट होगी.

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  3. यह सत्य है कि सोशल मीडिया पर दिन रत एक करने वाले सैनिक मात्र भारत माता के गौरव को पाने के लिए जूझ रहे है । भाजपा तो एक निमित्त मात्र है । हाँ मोदी के रूप में भारत को एक सच्चा राष्ट्रवादी दिखाई पड़ता है जो बिना किसी दैहिक भौतिक मानसिक लाभ के प्राण प्रण से निर्विकार भाव से अपने पथ पर चलते चले जा रहे है । आपकी लेखनी से निकले विचार मार्ग प्रशस्त करते रहे यही कामना है ।

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  4. यह सत्य है कि सोशल मीडिया पर दिन रत एक करने वाले सैनिक मात्र भारत माता के गौरव को पाने के लिए जूझ रहे है । भाजपा तो एक निमित्त मात्र है । हाँ मोदी के रूप में भारत को एक सच्चा राष्ट्रवादी दिखाई पड़ता है जो बिना किसी दैहिक भौतिक मानसिक लाभ के प्राण प्रण से निर्विकार भाव से अपने पथ पर चलते चले जा रहे है । आपकी लेखनी से निकले विचार मार्ग प्रशस्त करते रहे यही कामना है ।

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  5. आप का मनोबल टूटना पदातिकों का मनोबल टूटना नहीं है बल्कि सेनापतियों का मनोबल टूटना है ? हुंकार भरिये । बहुत से लोग रोकेंगे मगर जीतना तो है। कई बाधायें आएँगी, कई हार होंगी मगर अंतिम विजय राष्ट्रवादियों की यानी आपकी ही होगी। ये महाभारत आपको जीतना ही है। संभव है ये कार्य 10-15 की जगह 20-30 वर्ष ले ले मगर कटिबद्ध तो होना ही है।

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  6. मोदी जी ने बिहार चुनाव में जो भाषण दिए वो भले ही सही थे और भीड़ जुटी भी थी पर खाँचों में बटी बिहार की राजनीती को अमित काफी हलके में ले गए

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  7. भारत उत्सवप्रिय जनसमाज है इसमें भीड़ बड़ी जल्दी उमड़ पड़ती है देखने समझने में उतनी परिपक्व नहीं जितनी लगती हो । मामूली मदारी भी भीड़ जुटाने की कला जनता है फिर मोदीजी तो बड़े मंजे हुए राष्ट्रवादी समर्पित नेता हैं उन्हें इसकी गहरी समझ है । ये तो हमारी परिपक्वता और धैर्य की परीक्षा है -बिहारी जनता के मूड को वोट प्रतिशत से मपीए तो अंतर स्पष्ट होगा ।

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  8. भारत उत्सवप्रिय जनसमाज है इसमें भीड़ बड़ी जल्दी उमड़ पड़ती है देखने समझने में उतनी परिपक्व नहीं जितनी लगती हो । मामूली मदारी भी भीड़ जुटाने की कला जनता है फिर मोदीजी तो बड़े मंजे हुए राष्ट्रवादी समर्पित नेता हैं उन्हें इसकी गहरी समझ है । ये तो हमारी परिपक्वता और धैर्य की परीक्षा है -बिहारी जनता के मूड को वोट प्रतिशत से मपीए तो अंतर स्पष्ट होगा ।

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  9. निश्चित रूप से आपकी यह सोच सकारात्मक सत्य है कि सोशल मीडिया में भारतीय संस्कृति धर्म परंपरा संवर्द्धन के भाव से जुड़े लोगों को बिहार चुनाव से अधिक विस्तृत विषयों पर जागरूकता अभियान को बढ़ाने के लिए ही ध्यान देना चाहिए। इस भाव से ही मोदीजी के नेतृत्व में राष्ट्र धर्म ध्वजा के साथ का भाव सबल हो, राज्य सभा में भी बहुमत से बाधित कार्य भी शीघ्र हो सकें इसलिए विधायक संख्या की आवश्यकता गति बढ़ाने के लिए वांछित थी। व्यक्ति से समूह और उससे आगे राष्ट्र की ऊर्जावान प्रज्ञा के क्रम के लिए चतुराई व कुशलता के स्थान पर विवाद विषाद दुखद है। मराठा सत्ता ने 1758 में जीत के बाद भूल की थी और आज तक उसकी भरपाई नहीं हो पाई है इसलिए इतिहास के अध्याय कई बार दुखद त्रासदी दायक लगते हैं। हां यहां भी पुनः और भी सुदृढ़ होने की आवश्यकता है ताकि समय रहते कर्नाटक को पुनः प्राप्त कर इस कमी को कुछ स्तर पर सुधार लिया जाए।

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  10. निश्चित रूप से आपकी यह सोच सकारात्मक सत्य है कि सोशल मीडिया में भारतीय संस्कृति धर्म परंपरा संवर्द्धन के भाव से जुड़े लोगों को बिहार चुनाव से अधिक विस्तृत विषयों पर जागरूकता अभियान को बढ़ाने के लिए ही ध्यान देना चाहिए। इस भाव से ही मोदीजी के नेतृत्व में राष्ट्र धर्म ध्वजा के साथ का भाव सबल हो, राज्य सभा में भी बहुमत से बाधित कार्य भी शीघ्र हो सकें इसलिए विधायक संख्या की आवश्यकता गति बढ़ाने के लिए वांछित थी। व्यक्ति से समूह और उससे आगे राष्ट्र की ऊर्जावान प्रज्ञा के क्रम के लिए चतुराई व कुशलता के स्थान पर विवाद विषाद दुखद है। मराठा सत्ता ने 1758 में जीत के बाद भूल की थी और आज तक उसकी भरपाई नहीं हो पाई है इसलिए इतिहास के अध्याय कई बार दुखद त्रासदी दायक लगते हैं। हां यहां भी पुनः और भी सुदृढ़ होने की आवश्यकता है ताकि समय रहते कर्नाटक को पुनः प्राप्त कर इस कमी को कुछ स्तर पर सुधार लिया जाए।

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  11. उर्जादायक आलेख।।।।
    सत्य कहा आपने,हमारा लक्ष्य अभिप्रेत माँ भारती के वैभव की पुनर्स्थापना भर है।।इसमें जो सहयोगी होगा उसे हम अपना मानेंगे और जो भी शक्तियाँ भारत के नैतिक चारित्रिक पतन की जिम्मेवार होंगी उससे हमारी शत्रुता होगी।

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  12. उर्जादायक आलेख।।।।
    सत्य कहा आपने,हमारा लक्ष्य अभिप्रेत माँ भारती के वैभव की पुनर्स्थापना भर है।।इसमें जो सहयोगी होगा उसे हम अपना मानेंगे और जो भी शक्तियाँ भारत के नैतिक चारित्रिक पतन की जिम्मेवार होंगी उससे हमारी शत्रुता होगी।

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