समर्थक

सोमवार, 3 अक्तूबर 2016

बंधुओ, अंग्रेज़ी की एक कहावत है fore warned fore armed यानी अग्रिम चेतावनी मिलना सशस्त्र होना है। हमारे सैनिकों का पाकिस्तान के क़ब्ज़े वाले कश्मीर में स्ट्राइक करना केवल प्रारम्भ है। इस ठुकाई से आतंकवादी विचारधारा की साख दांव पर है और वो इसे सरलता से नहीं डूबने देंगे। हमारे वार को अगर वो चुपचाप पचा लेते हैं तो उनके आक़ाओं का पाकिस्तान में बाजा बज जायेगा। जिन परिवारों के बच्चों को अफ़ग़ानिस्तान, पाकिस्तान, कश्मीर में इस्लाम के नाम पर घरों से लिया है, जिहाद फ़ी सबीलिल्लाह के नाम पर कुत्ते की मौत मरवाया है, वही इनका जनाज़ा निकाल देंगे। अतः उनका जवाबी वार होना आज-कल की बात है।


भारत भर में जगह-जगह गाँधी-नेहरू की बोई हुई विषबेल मौजूद है। इस को दशकों से खाद-पानी दिया जाता रहा है। इस पर चुपचाप काम होता रहा है। न जाने कितने लोगों को मानसिक रूप से उन्होंने अवसर की प्रतीक्षा में तैयार करके दुबक कर रखा है। ये स्लीपर सैल अब सक्रिय हो सकते हैं और इनका स्वाभाविक निशाना भीड़भाड़ वाले क्षेत्र जैसे रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड, मॉल, भीड़भरे बाज़ार हो सकते हैं।


राज्य के पास हर मॉल, हर बाज़ार, हर सार्वजानिक स्थान पर तैनात करे के लिए पुलिस नहीं हो सकती अतः अब हमारे दायित्व का समय आया है। बंधुओ, इनकी संख्या कितनी भी बड़ी हो 120 करोड़ नहीं हो सकती। त्यौहार का समय है। कृपया आँखें खुली रखिये। कोई लावारिस गठरी, लावारिस सामान दिखे तो तुरन्त सावधान होइये। पुलिस को सूचित कीजिये। अपने मोहल्ले, कॉलोनी में किसी अपरिचित का अनायास अतिरिक्त आना-जाना दिखे तो उसे थाम कर पूछताछ कीजिये। यह मैसेज दीजिये कि 120 करोड़ लोग चौकन्ने हैं, 240 करोड़ आँखें देख रही हैं। 240 करोड़ हाथ तत्पर हैं।


वैसे मेरी समझ यह है कि यह हमारा यह प्रहार पूर्ण युद्ध में बदलेगा और सम्भवतः दिसम्बर-जनवरी से पाकिस्तान के टुकड़े होने तक जंग चलेगी। राष्ट्र के परम वैभव के शिखर पर जाने वाला मार्ग कंटकों से भरा है और यही एकमात्र मार्ग है।


मेरी भृकुटि यदि तन जाये तीसरा नेत्र मैं शंकर का
ब्रह्माण्ड कांपता है जिससे वह तांडव हूँ प्रलयंकर का
मैं रक्तबीज शिरउच्छेदक काली की मुंडमाल हूँ मैं
मैं इंद्रदेव का तीक्ष्ण वज्र चंडी की खड्ग कराल हूँ मैं
मैं चक्र सुदर्शन कान्हा का मैं कालक्रोध कल्याणी का
महिषासुर के समरांगण में मैं अट्टहास रुद्राणी का
मैं भैरव का भीषण स्वभाव मैं वीरभद्र की क्रोध ज्वाल
असुरों को जीवित निगल गया मैं वह काली का अंतराल
 मैं नागपंचमी के दिन यदि नागों को दूध पिलाता हूँ
तो आवश्यकता पड़ने पर जनमेजय भी बन जाता हूँ
फिर से अन्याय हुआ तो फिर कर दूंगा धरती शोणितमय

तुफ़ैल चतुर्वेदी

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें