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मंगलवार, 5 जुलाई 2016

बिसाहड़ा के निर्दोष बच्चों के प्रति हमारा कर्तव्य

Account Details
Sanjay Rana, Syndicate bank, Account no 87672200060453
IFSC code SYNB0008767, Bisahara distt Gautambudh nagar

मित्रो, बिसाहड़ा के अख़लाक़ के घर से बरामद किये गये मांस की रिपोर्ट आ गई है और वह गौमांस निकला है। जब अख़लाक़ और उसके परिवार ने गौहत्या का पाप किया है तो उन पर् इस सज्ञेय अपराध के लिये मुक़दमा चलना चाहिये। उत्तर प्रदेश सरकार के मुख्य मंत्री श्री अखिलेश यादव ने मुख्यमंत्री कोष से जो लगभग एक करोड़ रुपये और नोएडा में तीन फ़्लैट इन अभियुक्तों को दिये हैं वो सरकार को ज़ब्त कर लेने चाहिये। मुख्यमंत्री कोष अभियुक्तों की सहायता के लिये नहीं होता।

अभी तक इस विषय पर मेरा योगदान केवल यह था कि मैंने पांचजन्य में इस विषय पर एक लेख लिखा था। जिसको ले कर प्रेस में कई दिन तक हंगामा मचता रहा था "संघ के मुख पत्र में लेखक ने गौ हत्या करने वाले का वध उचित ठहराया है, वेदसम्मत बताया है " । मेरी दृष्टि में इस विषय पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, हिन्दू जागरण मंच, विश्व हिन्दू परिषद, अधिवक्ता परिषद, भाजपा, भाजपा की स्थानीय विधायक विमला बाथम, भाजपा के स्थानीय सांसद/ मंत्री डॉक्टर महेश शर्मा सक्रिय थे और यथायोग्य कर रहे थे। यानी अभियुक्त ठहराये और बंदी बनाये गये 18 बच्चों की चिंता हो रही थी।

अब नई परिस्थिति पैदा हो गयी तो मन किया कि चलिये बिसाहड़ा चला जाये और छह दिन पहले मैं तथा फ़ेस बुक के एक मित्र निर्भय यादव बिसाहड़ा चले गये। जीवन की मार से त्रस्त, थके-थके चेहरे, बुझी-बुझी अांखें, ऐसे नितांत निर्धन लोग जिनके बदन पर् कपड़े तक कटे-फटे थे, से भेंट हुई। मुख्य अभियुक्त के पिता श्री संजय राणा जो भाजपा और संघ के 30 वर्ष पुराने कार्यकर्ता हैं के अनुसार, 9 माह में उन लोगों से मिलने वाला मैं दूसरा और सहायता करने वाला पहला व्यक्ति हूँ। ज्ञात हुअा कि इन 18 बच्चों में से 6 के परिवार में रोटियों के भी लाले हैं।

मैं कुछ देर के लिये सुन्न रह गया। जिसे ब्लैक अाउट कहते हैं, ऐसी स्थिति अा गयी। कुछ देर बाद जब दिमाग़ से अंधेरा हटा तो जो पहले विचार उभरे वो यह थे...... " क्या हम हिन्दू ....समाज हैं भी ? हममें जीवित रहने का कोई लक्षण है भी ? हमारे संगठन क्या कर रहे हैं ? मैं ही कितना स्वार्थी-अालसी हूँ कि  मेरी अांखें नौ माह बाद अपने भाइयों के अाँसुओं को देख पाईं ? देश में लाचार, बेसहारा हिंदुओं की चिंता करने वाला कोई है भी ?

हिन्दू संगठनों के नेताओं की उस समय की प्रेस कॉन्फ्रेंस, टी वी बाइट, अख़बारों में बयानबाज़ी ध्यान कीजिये। लोग गांव में मन्दिर तक जाते थे। प्रेस को इंटरव्यू दे कर कर्तव्य पूर्ण हुअा समझ लेते थे। बंधुओ, गिरफ़्तार 18 लोगों में अभी भी 17 लोग जेल में हैं। कोई आर्थिक सहायता, वकीलों की व्यवस्था कभी नहीं हुई।  गांव वालों ने अापस में चंदा एकत्र कर दो लाख रुपये जमा किये हैं। जिन वकीलों को इन पीडितों ने कोर्ट में खड़ा किया उन्होंने निश्चित रूप से अपनी ओर से कुछ नहीं मांगा। उसी 2 लाख से जो इन्होंने वकीलों को दिया वो उन्होंने बिना कुछ कहे चुपचाप रख लिया।

अभी पांचजन्य के पिछले किसी अंक में मेवात पर यह रिपोर्ट अाई है। मेवात देश की राजधानी दिल्ली से मात्र 60 किलोमीटर की दूरी पर गुड़गांव से अलवर के रास्ते आगे बढ़ने पर सोहना के बाद शुरू हो जाता है। 1947 में बंगलादेश में करीब 30 प्रतिशत और मेवात में भी लगभग 30 प्रतिशत हिन्दू थे। जैसे बंगलादेश में करीब 8 प्रतिशत हिन्दू रह गए हैं, यही स्थिति मेवात की भी हो गई है। आज हरियाणा के मेवात में हिन्दुओं के साथ वह सब हो रहा है जो बंगलादेश या पाकिस्तान में हिन्दुओं के साथ होता है। हिन्दू लड़कियों और महिलाओं का अपहरण और फिर किसी मुस्लिम के साथ जबरन निकाह। हिन्दू व्यापारियों से जबरन पैसे की वसूली करना। मंदिरों और श्मशान के भूखंडों पर कब्जा करना। बंगलादेशी घुसपैठियों को बसाना। हिन्दुओं को झूठे मुकदमों में फंसाना। हिन्दुओं के यहां डाका डालना।

अब मैं यह प्रश्न सबसे पहले अापसे फिर सभी हिन्दू संगठनों के नेताओं से पूछना चाहता हूंं कि अफगानिस्तान, पाकिस्तान, बांग्लादेश के बाद वर्तमान कटे-फटे-शेष बचे भारत को बचाने का रास्ता क्या है ? बंगाल तथा असम के बांग्लादेश से लगते अनेकों ज़िलों, बिहार, उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु, केरल, हरियाणा, पंजाब के विभिन्न क्षेत्रों में तेज़ी से उभर रही इस समस्या का समाधान क्या है ? क्या तेजस्वी हिंदुओं को प्रभावी, शक्तिशाली बनाने, उनके साथ हर प्रकार से खड़े होने के अतिरिक्त कोई मार्ग है ? क्या बंद कमरों के भाषण, फ़ेस बुक की गर्मागर्म पोस्टिंग, लाइक, शेयर इस सिलसिले में कुछ भी कर सकते हैं ? हमारा सारा तेज अगर हमारी अपनी जेब से धन नहीं निकलवा सकता तो कुछ समय बाद कैराना, मेवात और इसी तरह के गांवों, नगरों, बस्तियों को उजड़ने से कौन रोक सकता है ? हम जूझ नहीं सकते तो लड़ने वालों के साथ तो खड़े हो सकते हैं।

मेरा प्रस्ताव है कि हमें उन अट्ठारह बच्चों के लिये प्रति बच्चा एक लाख रुपया उनके परिवारों तक पहुंचाना चाहिए। इससे उनका और प्रत्येक तेजस्वी चिंतन वाले व्यक्ति का सम्बल बढ़ेगा। ऐसे लोगों तक यह संदेश जाना कि अाप अकेले नहीं हैं, समाज साथ खड़ा है, उनकी उर्जा को बढ़ायेगा। समाज में इन वीरों का अनुकरण के लिये लोग तैय्यार होंगे और यही हल है। महाराणा प्रताप के इन सिसोदिया वंशजों के साथ खड़े होने के लिये भामाशाह बनिए। स्वयम पर दबाव डाल कर अपनी मासिक आमदनी का 10% या 5,000 जो भी अधिक हो दीजिये। मित्र-बंधुओं की भी प्रेरित कीजिए। अाश्वस्त रहिये कि ऊपर दिए गये इस अकाउंट में जमा धन उन 18 बच्चों के परिवार तक बराबर बांटा जायेगा। 

तुफ़ैल चतुर्वेदी

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